Friday, August 8, 2008

हमारी बारी


रात गुजरी नहीं
हमने आंखों में गुजारी है
आस्‍मां रो चुका है
अब हमारी बारी है

क्‍या करना है हमें
दि‍खाकर अपने अश्‍क
दर्द देने वाले
जब यही मर्जी तुम्‍हारी है

Sunday, July 13, 2008

एक प्रश्‍न


एक प्रश्‍न
कुरेदता है बार-बार
कि‍ जब समय
इतना परि‍वर्तनशील है
तो क्‍यों
अपने दुख-दर्द को
बांटता है आदमी,,,,
परि‍णति‍
कुछ भी नहीं
फि‍र उजालों से छि‍पकर
क्‍यों रोता है आदमी।

Sunday, June 8, 2008

हमें मालूम है


तुझे चाहने से क्‍या होगा
हमें मालूम है
ये जां इस जि‍स्‍म से जुदा होगा
हमें मालूम है

हम तड़पते हैं तड़पा करेंगे
हर वक्‍त मगर
तड़पोगे तुम भी तो कयामत होगा
हमें मालूम है

खाक में ‍मि‍लना है हमें
‍मिल जाएंगे खामोशी से
हक मोहब्‍बत का अदा कैसे होगा
हमें मालूम है

गुजरते वक्‍त की तरह हमें भी
भुला दोगे तुम
हमारे जाने के बाद क्‍या होगा
हमें मालूम है।

Sunday, May 25, 2008

गम न कीजि‍ए


नशेमन जला है
तो फि‍र बना लीजि‍ए
चमन के उजड़ने का
गम न कि‍या कीजि‍ए

साए में अंधेरों के
वक्‍त गुजर ही जाएगा
वो बैठे हैं पहलू में
बस ये सोचा कीजि‍ए

करना हो मुश्‍ि‍कल
गर फैसला जिंदगी का
हर फैसले को
तकदीर पर छोड़ दि‍या कीजि‍ए

दरि‍म्‍यां हमारे
फासला कम न होगा कभी
हकीकत में मुमि‍कन नहीं
ख्‍वाबों में मि‍ल लि‍या कीजि‍ए।

Thursday, April 17, 2008

गर आप न आए

मुद्दतें गुज़र गईं
दीदार न हुआ आपका
दिल क्या अब तलक भी
बेकरार न हुआ आपका
गुनाह है अपना
ठहराते हैं गुनहगार नसीब को
इस बात पे हमें
ऐतबार न हुआ आपका
गर आप न आए
तो थाम लेंगे हम
मौत का दामन
कह जाएंगे दुनिया को
हमसे इंतजार न हुआ आपका...

Thursday, April 3, 2008

जुदाई का हौसला

लाऊंगी कहां मैं जुदाई का हौसला
क्‍यों इस कदर मेरे करीब आ रहे हो तुम?
मेरी हर धड़कन, हर सांस में शामि‍ल हो मगर
मेरे हाथों की इन लकीरों में कहां हो तुम?

तेरा बनना तो नामुमि‍कन है इस जिंदगी में
क्‍यों मुझसे ऐसे वफा नि‍भा रहे हो तुम?
उल्‍फत में तेरी हो जाऊंगी बरबाद
क्‍यों इश्‍क के जज्‍बे को भड़का रहे हो तुम?

Tuesday, March 18, 2008

ये दि‍ल


बेबात ही कभी-कभी
भर आता है दि‍ल
जाने क्‍यों कभी-कभी
तड़प जाता है दि‍ल
चाह कर भी नहीं मि‍लता
जब रोने का बहाना
तब अंदर ही अंदर
जल जाता है दि‍ल

तन्‍हाइयों से जब
जी घबराता है, तब
यादों को पास अपने
बुलाता है दि‍ल
आखि‍र क्‍या करें, कि‍ससे
करें शि‍कवा
यही सोचकर
खामोश हो जाता है दि‍ल

Wednesday, March 12, 2008

उदास चांदनी


उदास चांदनी
कुछ इस तरह
हमारे दि‍ल में
उतर जाती है

गोया
सीने में
कोई नश्‍तर
हौले से
चुभा दि‍या हो
कि‍सी ने

Tuesday, March 11, 2008

तुम्‍हारा खत

नि‍त नई पीड़ा

मन में बोती है
असंतुष्‍ि‍ट का बीज
और
नि‍कलता है पौध
अलगाव का

मन में फि‍र
मच जाता है द्वंद्व
और
मि‍लता है
आंसुओं को न्‍योता

आती हैं यादें
जाती है
मन
किंकर्तव्यविमूढ़,

तभी 'जिंदगी' को
मि‍लता है
तुम्‍हारा खत
और

उठता है फि‍र
भावनाओं का
ज्‍‍वार
लेता है प्‍यार
हृदय में हि‍लोरें
और

दबी यादें
सर उठाती हैं
बुलाती हैं
तुम्‍हें........

Wednesday, March 5, 2008

संजीवनी

संजीवनी

तुम्‍हारे शब्‍द
स्‍मृति‍
कंटक राहों की डोर

तुम्‍हारा साथ
सागर का ठहराव
वि‍श्‍वास
अटल चट्टान
और हृदय
पत्‍थरों से नि‍कलकर
बहता हुआ
एक नि‍र्मल
झरना

ये जीवन
बस तुममें ही
समाहि‍त होगा
आदर्श रहोगे तुम
'जिंदगी'
याद करेगी
तुमको
नीले स्‍वच्‍छ
आकाश सा,
तुम पास रहो
या नहीं